Munawwar Rana Ghazal | मुनव्वर राना ग़ज़ल हिंदी | Munawwar Rana

Munawwar Rana Ghazal : मुनव्वर राना ग़ज़ल अगर आपको पढना पसंद हैं और आपके दोस्तों को ग़ज़ल पढना पसंद हैं तो आप अपनी दोस्तों के साथ शेयर  कर सकते हैं मुनव्वर राना जी एक उर्दू के जानेमाने प्रसिद्ध साहित्यकार है इनका जन्म 26 नवंबर 1952 में रायबरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ था मुनव्वर राना की कुछ प्रसिद्ध ग़ज़ल जो मेने इस पोस्ट में लिखे हैं  अगर आपको अच्छे लगे तो इसको शेयर कर दे और कमेंट में भी बताये

मुनव्वर राना ग़ज़ल हिंदी

 

ये तेरा घर ये मेरा घर, किसी को देखना हो गर
तो पहले आके माँग ले, मेरी नज़र तेरी नज़र ये घर बहुत हसीन है

 

न बादलों की छाँव में, न चाँदनी के गाँव में
न फूल जैसे रास्ते, बने हैं इसके वास्ते

 

munawwar rana ghazal
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मगर ये घर अजीब है, ज़मीन के क़रीब है
ये ईँट पत्थरों का घर, हमारी हसरतों का घर

 

जो चाँदनी नहीं तो क्या, ये रोशनी है प्यार की
दिलों के फूल खिल गये, तो फ़िक्र क्या बहार की

 

हमारे घर ना आयेगी, कभी ख़ुशी उधार की
हमारी राहतों का घर, हमारी चाहतों का घर

 

यहाँ महक वफ़ाओं की है, क़हक़हों के रंग है
ये घर तुम्हारा ख़्वाब है, ये घर मेरी उमंग है

 

न आरज़ू पे क़ैद है, न हौसले पर जंग है
हमारे हौसले का घर, हमारी हिम्मतों का घर

 

ये बता दे मुझे ज़िन्दगी प्यार की राह के हमसफ़र
किस तरह बन गये अजनबी ये बता दे मुझे ज़िन्दगी

 

फूल क्यूँ सारे मुरझा गये किस लिये बुझ गई चाँदनी
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी

 

कल जो बाहों में थी और निगाहों में थी
अब वो गर्मी कहाँ खो गई

 

“munawwar rana on pita”

 

न वो अंदाज़ है न वो आवाज़ है
अब वो नर्मी कहाँ खो गई ये बता दे मुझे ज़िन्दगी

 

बेवफ़ा तुम नहीं बेवफ़ा हम नहीं फिर वो जज़्बात क्यों सो गये
प्यार तुम को भी है प्यार हम को भी है फ़ासले फिर ये क्या हो गये
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी

 

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क्यूँ ज़िन्दगी की राह में मजबूर हो गए
इतने हुए करीब कि हम दूर हो गए

 

ऐसा नहीं कि हमको कोई भी खुशी नहीं
लेकिन ये ज़िन्दगी तो कोई ज़िन्दगी नहीं

 

क्यों इसके फ़ैसले हमें मंज़ूर हो गए
पाया तुम्हें तो हमको लगा तुमको खो दिया

 

हम दिल पे रोए और ये दिल हम पे रो दिया
पलकों से ख़्वाब क्यों गिरे क्यों चूर हो गए

 

तुमको देखा तो ये ख़याल आया
ज़िन्दगी धूप तुम घना साया

 

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की
आज फिर दिल को हमने समझाया

 

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया, हमने क्या पाया

 

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया

 

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी
मेरे हालात की आंधी में बिखर जाओगी

 

रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिन्दा हूँ
ये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँ

 

ख़्वाब क्यूँ देखूँ वो कल जिसपे मैं शर्मिन्दा हूँ
मैं जो शर्मिन्दा हुआ तुम भी तो शरमाओगी

 

क्यूं मेरे साथ कोई और परेशान रहे
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे

 

ज़िन्दगी का ये सफ़र तुमको तो आसान रहे
हमसफ़र मुझको बनाओगी तो पछताओगी

 

एक मैं क्या अभी आयेंगे दीवाने कितने
अभी गूंजेगे मुहब्बत के तराने कितने

 

munawwar rana ghazal
munawwar rana ghazal image

 

ज़िन्दगी तुमको सुनायेगी फ़साने कितने
क्यूं समझती हो मुझे भूल नही पाओगी

 

 

दर्द अपनाता है पराए कौन
कौन सुनता है और सुनाए कौन

 

कौन दोहराए वो पुरानी बात
ग़म अभी सोया है जगाए कौन

 

वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं
कौन दुख झेले आज़माए कौन

 

अब सुकूँ है तो भूलने में है
लेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन

 

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास
देखिये आज याद आए कौन.

 

हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है
हँसती आँखों में भी नमी-सी है

 

दिन भी चुप चाप सर झुकाये था
रात की नब्ज़ भी थमी-सी है

 

“munawwar rana nazm”

 

किसको समझायें किसकी बात नहीं
ज़हन और दिल में फिर ठनी-सी है

 

ख़्वाब था या ग़ुबार था कोई
गर्द इन पलकों पे जमी-सी है

 

कह गए हम ये किससे दिल की बात
शहर में एक सनसनी-सी है

 

हसरतें राख हो गईं लेकिन
आग अब भी कहीं दबी-सी है

 

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया

 

उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी वो शायद बरा-ए-मेहरबानी दे गया

 

सब हवायें ले गया मेरे समंदर की कोई
और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया

 

ख़ैर मैं प्यासा रहा पर उस ने इतना तो किया
मेरी पलकों की कतारों को वो पानी दे गया

 

कभी यूँ भी तो हो दरिया का साहिल हो
पूरे चाँद की रात हो और तुम आओ

 

कभी यूँ भी तो हो परियों की महफ़िल हो
कोई तुम्हारी बात हो और तुम आओ

 

कभी यूँ भी तो हो ये नर्म मुलायम ठंडी हवायें
जब घर से तुम्हारे गुज़रें तुम्हारी ख़ुश्बू चुरायें मेरे घर ले आयें

 

कभी यूँ भी तो हो सूनी हर मंज़िल हो
कोई न मेरे साथ हो और तुम आओ

 

कभी यूँ भी तो हो ये बादल ऐसा टूट के बरसे
मेरे दिल की तरह मिलने को तुम्हारा दिल भी तरसे तुम निकलो घर से

 

कभी यूँ भी तो हो तनहाई हो, दिल हो
बूँदें हो, बरसात हो और तुम आओ कभी यूँ भी तो हो

 

मैनें दिल से कहा ऐ दीवाने बता जब से कोई मिला तू है खोया हुआ
ये कहानी है क्या है ये क्या सिलसिला ऐ दीवाने बता

 

 

मैनें दिल से कहा ऐ दीवाने बता धड़कनों में छुपी
कैसी आवाज़ है कैसा ये गीत है कैसा ये साज़ है
कैसी ये बात है कैसा ये राज़ है ऐ दीवाने बता

 

मेरे दिल ने कहा जब से कोई मिला चाँद तारे फ़िज़ा
फूल भौंरे हवा ये हसीं वादियाँ नीला ये आसमाँ
सब है जैसे नया मेरे दिल ने कहा

 

“munawwar rana shayari”

 

इक पल गमों का दरिया, इक पल खुशी का दरिया
रूकता नहीं कभी भी, ये ज़िन्गी का दरिया

 

आँखें थीं वो किसी की, या ख़्वाब की ज़ंजीरे
आवाज़ थी किसी की, या रागिनी का दरिया

 

इस दिल की वादियों में, अब खाक उड़ रही है
बहता यहीं था पहले, इक आशिकी का दरिया

 

किरनों में हैं ये लहरें, या लहरों में हैं किरनें
दरिया की चाँदनी है, या चाँदनी का दरिया

 

पयास की कैसे लाए ताब कोई
नहीं दरिया तो हो सराब कोई

 

रात बजती थी दूर शहनाई
रोया पीकर बहुत शराब कोई

 

कौन सा ज़ख्म किसने बख्शा है
उसका रखे कहाँ हिसाब कोई

 

फिर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की
आने वाला है फिर अज़ाब कोई

 

यही हालात इब्तदा से रहे
लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे

 

“मुनव्वर राना शायरी हिंदी”

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बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन
ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे

 

इन चिराग़ों में तेल ही कम था
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे

 

बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी
तुम नहीं रहे तो ये दिलासे रहे

 

उसके बंदों को देखकर कहिये
हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे

Rahat Indori Famous Shayari

 

ज़िन्दगी की शराब माँगते हो
हमको देखो कि पी के प्यासे रहे

 

मिसाल इसकी कहाँ है ज़माने में
कि सारे खोने के ग़म पाये हमने पाने में

 

वो शक्ल पिघली तो हर शै में ढल गई जैसे
अजीब बात हुई है उसे भुलाने में

 

जो मुंतज़िर न मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा
कि हमने देर लगा दी पलट के आने में

 

लतीफ़ था वो तख़य्युल से, ख़्वाब से नाज़ुक
गँवा दिया उसे हमने ही आज़माने में

 

समझ लिया था कभी एक सराब को दरिया
पर एक सुकून था हमको फ़रेब खाने में

 

झुका दरख़्त हवा से, तो आँधियों ने कहा
ज़ियादा फ़र्क़ नहीं झुक के टूट जाने में

 

“shubh prabhat photo”

निष्कर्ष

दोस्तों इस पोस्ट  को पड़ने के लिए धन्यवाद इय होप ये पोस्ट Munawwar Rana Ghazal | मुनव्वर राना ग़ज़ल हिंदी | Munawwar Rana आपको अच्छी लगी हो तो इसको अपने दोस्तों या  फॅमिली में शेयर करे  दोस्तों इस Vipchilli वेबसाइट पर कोट्स शायरी मिलते हैं उम्मीद हैं आप अपने दोस्तों को या पोस्ट शेयर करंगे दोस्तों इस पोस्ट में कुछ भी मिस्टेक हो तो कमेंट करके बताये  आप आज का दिन अच्छा जाये  फिर मिलते हैं अगली पोस्ट …

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