Top Kabir Das ke Dohe Hindi – संत कबीर के प्रसिद्द दोहे और उनके अर्थ.

Top Kabir Das ke Dohe Hindi : संत कबीर के प्रसिद्द दोहे और उनके अर्थ. जानेमाने एक कबीर हैं उनकी बहुत प्रसिद्द दोहे लोगो को पसंद हैं उए एक फेमस प्रसिद्द दोहे हैं अगर  आपको संत कबीर के प्रसिद्द दोहे और उनके अर्थ.पढना पसंद हैं और आप अपने दोस्तों के साथ दोहे करना पसंद करते  है दोहे कर सकते हैं आपको और दोहे पड़ना हैं तो आपको यहाँ vipchilli पर सबसे  दोहे  Famous Shayari मिलेंगे। हम यहाँ आपके साथ सभी Category के दोहे  Shayari शेयर करते हैं, ताकि आप अपने जीवन के हर एक पल ख़ुशी से जी  सके। कुछ लोग  दोहे   पढना  पसंद करते  है,  अपग्र आपको कुछ भी प्रशन हैं तो कमेंट में पूझ सकते हैं

संत कबीर के प्रसिद्द दोहे और उनके अर्थ.

 

तरवर तास बिलम्बिए, बारह मांस फलंत ।
सीतल छाया गहर फल, पंछी केलि करंत

अर्थ: कबीर कहते हैं कि ऐसे वृक्ष के नीचे विश्राम करो, जो बारहों महीने फल देता हो .
जिसकी छाया शीतल हो ,फल सघन हों और जहां पक्षी क्रीडा करते हों !

 

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है।
इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।

 

मन मरया ममता मुई, जहं गई सब छूटी।
जोगी था सो रमि गया, आसणि रही बिभूति

अर्थ: मन को मार डाला ममता भी समाप्त हो गई अहंकार सब नष्ट हो गया जो योगी था वह तो यहाँ से चला गया
अब आसन पर उसकी भस्म – विभूति पड़ी रह गई अर्थात संसार में केवल उसका यश रह गया

 

पतिबरता मैली भली गले कांच की पोत ।
सब सखियाँ में यों दिपै ज्यों सूरज की जोत ॥

अर्थ: पतिव्रता स्त्री यदि तन से मैली भी हो भी अच्छी है. चाहे उसके गले में केवल कांच के मोती की माला ही क्यों न हो.
फिर भी वह अपनी सब सखियों के बीच सूर्य के तेज के समान चमकती है !

Kabir Das ke Dohe
Kabir Das ke Dohe

 

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर।

अर्थ: इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो
और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो !

 

 

जानि बूझि साँचहि तजै, करै झूठ सूं नेह ।
ताकी संगति रामजी, सुपिनै ही जिनि देहु

अर्थ: जो जानबूझ कर सत्य का साथ छोड़ देते हैं झूठ से प्रेम करते हैं
हे भगवान् ऐसे लोगों की संगति हमें स्वप्न में भी न देना.

 

हू तन तो सब बन भया करम भए कुहांडि ।
आप आप कूँ काटि है, कहै कबीर बिचारि॥

अर्थ: यह शरीर तो सब जंगल के समान है – हमारे कर्म ही कुल्हाड़ी के समान हैं.
इस प्रकार हम खुद अपने आपको काट रहे हैं – यह बात कबीर सोच विचार कर कहते हैं.

 

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।

अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा नहीं मिला।
लेकिन जब मैंने अपने मन में झांक कर देखा खुद से ज्‍यादा बुरा क‍िसी को भी नहीं पाया।

 

ऊंचे कुल क्या जनमिया जे करनी ऊंच न होय।
सुबरन कलस सुरा भरा साधू निन्दै सोय ॥

अर्थ: यदि कार्य उच्च कोटि के नहीं हैं तो उच्च कुल में जन्म लेने से क्या लाभ?
सोने का कलश यदि सुरा से भरा है तो साधु उसकी निंदा ही करेंगे.

 

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

अर्थ: बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुंच गए, पर सभी विद्वान न हो सके।
कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले,
अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा।

 

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

अर्थ: कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता,
उसके मन की हलचल शांत नहीं होती। कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है
कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलो या फेरो।

 

मन मैला तन ऊजला बगुला कपटी अंग ।
तासों तो कौआ भला तन मन एकही रंग ॥

अर्थ: बगुले का शरीर तो उज्जवल है पर मन काला – कपट से भरा है –
उससे तो कौआ भला है जिसका तन मन एक जैसा है और वह किसी को छलता भी नहीं है

 

बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।

अर्थ: यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है।
इसलिए वह ह्रदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुंह से बाहर आने देता है।

 

करता केरे गुन बहुत औगुन कोई नाहिं।
जे दिल खोजों आपना, सब औगुन मुझ माहिं ॥

अर्थ: प्रभु में गुण बहुत हैं – अवगुण कोई नहीं है.जब हम अपने ह्रदय की खोज करते हैं
तब समस्त अवगुण अपने ही भीतर पाते हैं.

Rahat Indori Shayari

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है।
जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है

 

झूठे को झूठा मिले, दूंणा बंधे सनेह
झूठे को साँचा मिले तब ही टूटे नेह ॥

अर्थ: जब झूठे आदमी को दूसरा झूठा आदमी मिलता है तो दूना प्रेम बढ़ता है.
पर जब झूठे को एक सच्चा आदमी मिलता है तभी प्रेम टूट जाता है.

Kabir Das ke Dohe
Kabir Das ke Dohe Image

कबीर सोई पीर है जो जाने पर पीर ।
जो पर पीर न जानई सो काफिर बेपीर ॥

अर्थ: कबीर कहते हैं कि सच्चा पीर – संत वही है जो दूसरे की पीड़ा को जानता है
जो दूसरे के दुःख को नहीं जानते वे बेदर्द हैं – निष्ठुर हैं और काफिर हैं.

 

कबीर सो धन संचिए जो आगे कूं होइ।
सीस चढ़ाए पोटली, ले जात न देख्या कोइ ॥

अर्थ: कबीर कहते हैं कि उस धन को इकट्ठा करो जो भविष्य में काम दे.
सर पर धन की गठरी बांधकर ले जाते तो किसी को नहीं देखा.

 

साधु भूखा भाव का धन का भूखा नाहीं ।
धन का भूखा जो फिरै सो तो साधु नाहीं ॥

अर्थ: साधु का मन भाव को जानता है, भाव का भूखा होता है, वह धन का लोभी नहीं होता
जो धन का लोभी है वह तो साधु नहीं हो सकता !

 

मैं मैं मेरी जिनी करै, मेरी सूल बिनास ।
मेरी पग का पैषणा मेरी गल की पास ॥

अर्थ: ममता और अहंकार में मत फंसो और बंधो – यह मेरा है कि रट मत लगाओ –
ये विनाश के मूल हैं – जड़ हैं – कारण हैं – ममता पैरों की बेडी है और गले की फांसी है

 

झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद।
खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि अरे जीव ! तू झूठे सुख को सुख कहता है और मन में प्रसन्न होता है?
देख यह सारा संसार मृत्यु के लिए उस भोजन के समान है,
जो कुछ तो उसके मुंह में है और कुछ गोद में खाने के लिए रखा है।

 

“shubh prabhat shayari”

निष्कर्ष

दोस्तों इस पोस्ट  को पड़ने के लिए धन्यवाद इय होप ये पोस्ट Top Kabir Das ke Dohe Hindi – संत कबीर के प्रसिद्द दोहे और उनके अर्थ. आपको अच्छी लगी हो तो इसको अपने दोस्तों या  फॅमिली में शेयर करे  दोस्तों इस Vipchilli वेबसाइट पर कोट्स शायरी मिलते हैं उम्मीद हैं आप अपने दोस्तों को या पोस्ट शेयर करंगे दोस्तों इस पोस्ट में कुछ भी मिस्टेक हो तो कमेंट करके बताये  आप आज का दिन अच्छा जाये  फिर मिलते हैं अगली पोस्ट …

Sharing :

Aziz is a Website designer of this website ( vipchilli.com ) it is a Profession Generate mock test quiz question . He is quotes Shayari social Worker .

Leave a Comment